केंद्र सरकार ने Financial Year 2027 की दूसरी छमाही (H2FY27) के लिए ₹7.86 ट्रिलियन यानी लगभग ₹7.86 लाख करोड़ उधार लेने की योजना बनाई है। यह राशि Dated Government Securities जारी करके जुटाई जाएगी।
सरकार ने FY27 की पहली छमाही यानी H1FY27 में पहले ही ₹8.14 ट्रिलियन की borrowing की है। H1 और H2 की borrowing को मिलाने पर FY27 में Gross Market Borrowing लगभग ₹16 ट्रिलियन रहने का अनुमान है।
सरकार का Net Market Borrowing का Budget Estimate ₹11.73 ट्रिलियन रखा गया है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से Fiscal Deficit को वित्तपोषित करने के लिए किया जाएगा।
Table of Contents
- Gross और Net Market Borrowing क्या है?
- FY27 में सरकार की Borrowing
- सरकार Longer-Tenor Securities पर क्यों बढ़ा रही है जोर?
- H2FY27 में 23 Weekly Auctions होंगी
- Sovereign Green Bond क्या है?
- Treasury Bills से भी होगी Short-Term Borrowing
- Ways and Means Advances (WMA) क्या है?
- Fiscal Deficit से Debt-to-GDP Ratio की ओर बदलाव
- Debt-to-GDP Ratio क्या है?
- निष्कर्ष
Gross और Net Market Borrowing क्या है?
सरकारी उधारी को समझने के लिए Gross Market Borrowing और Net Market Borrowing दो महत्वपूर्ण terms हैं। Gross Market Borrowing का मतलब है कि सरकार एक वित्त वर्ष में Government Securities जारी करके कुल कितनी राशि उधार लेती है।
वहीं, Net Market Borrowing में कुल borrowing से पुराने कर्ज की repayment को घटाने के बाद बची राशि को देखा जाता है। यह सरकार के Fiscal Deficit को पूरा करने के प्रमुख स्रोतों में से एक है।
FY27 में सरकार की Borrowing
| विवरण | FY27 आंकड़ा |
| H1 Dated Securities Borrowing | ₹8.14 ट्रिलियन |
| H2 Dated Securities Borrowing | ₹7.86 ट्रिलियन |
| अनुमानित Gross Market Borrowing | लगभग ₹16 ट्रिलियन |
| Budget Estimate of Gross Borrowing | ₹17.2 ट्रिलियन |
| Net Market Borrowing | ₹11.73 ट्रिलियन |
| अनुमानित Repayment | ₹4.36 ट्रिलियन |
सरकार Longer-Tenor Securities पर क्यों बढ़ा रही है जोर?
H2FY27 की borrowing योजना में सरकार ने Longer-Tenor Government Securities का हिस्सा बढ़ाया है। इसका मतलब है कि सरकार लंबे समय में maturity वाली securities के जरिए ज्यादा borrowing करेगी। उदाहरण के लिए, 15-year securities का हिस्सा H1 के 14.5% से बढ़ाकर H2 में 17.6% किया गया है।
इसके अलावा 30-year, 40-year और 50-year maturity वाली securities के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। दूसरी ओर, 5-year और 10-year securities का हिस्सा कम हुआ है।
| Maturity | H1 हिस्सा | H2 हिस्सा |
| 15-year | 14.5% | 17.6% |
| 10-year | 29.0% | 26.3% |
| 5-year | 15.4% | 12.1% |
| 7-year | 8.1% | 9.1% |
| 3-year | 8.1% | 6.9% |
Longer-tenor securities का ज्यादा इस्तेमाल सरकार की Weighted Average Maturity (WAM) को बढ़ा सकता है। इससे आने वाले वर्षों में maturity वाले कर्ज को बार-बार refinance या rollover करने की जरूरत कम हो सकती है।
H2FY27 में 23 Weekly Auctions होंगी
सरकार H2FY27 में borrowing programme को पूरा करने के लिए 23 Weekly Auctions आयोजित करेगी। प्रत्येक auction के माध्यम से सरकार लगभग ₹33,000 करोड़ से ₹36,000 करोड़ तक की राशि जुटाने की योजना बना रही है। इसके अलावा सरकार Sovereign Green Bonds के माध्यम से H2FY27 में ₹15,000 करोड़ जुटाने की योजना भी बना रही है।
Sovereign Green Bond क्या है?
Sovereign Green Bond एक प्रकार का Government Debt Instrument है। इसके जरिए जुटाई गई राशि का इस्तेमाल ऐसे eligible projects के लिए किया जाता है जिनका संबंध Environment, Climate Change और Sustainable Development से होता है. Government Securities की auction आमतौर पर Reserve Bank of India (RBI) द्वारा आयोजित की जाती है।
Treasury Bills से भी होगी Short-Term Borrowing
Long-term borrowing के अलावा सरकार ने Short-Term Borrowing का programme भी जारी किया है। सरकार Q3FY27, यानी अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान Treasury Bills (T-Bills) के जरिए लगभग ₹2.99 ट्रिलियन उधार लेने की योजना बना रही है।
Treasury Bills short-term Government Securities होती हैं, जिनकी maturity आमतौर पर एक वर्ष से कम होती है। इन्हें discount पर जारी किया जाता है और maturity पर face value यानी par value पर भुगतान किया जाता है।
Ways and Means Advances (WMA) क्या है?
सरकार के cash inflow और payment में कभी-कभी अस्थायी अंतर हो सकता है। ऐसी स्थिति में Ways and Means Advances (WMA) के जरिए RBI सरकार को temporary financial accommodation देता है। H2FY27 के लिए WMA limit ₹50,000 करोड़ रखी गई है।
WMA का उद्देश्य केवल short-term cash mismatch को manage करना है। इसका इस्तेमाल लगातार बने रहने वाले Fiscal Deficit को पूरा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
Fiscal Deficit से Debt-to-GDP Ratio की ओर बदलाव
सरकार ने अपने Fiscal Anchor के approach में भी बदलाव किया है। अब Fiscal Deficit Ratio के बजाय Debt-to-GDP Ratio पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक Debt-to-GDP Ratio को 49% से 51% के बीच लाना है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान Debt-to-GDP Ratio 58.2% है, जबकि संबंधित वार्षिक लक्ष्य 56.1% बताया गया है।
Debt-to-GDP Ratio क्या है?
Debt-to-GDP Ratio किसी देश के कुल सरकारी कर्ज की तुलना उसकी GDP से करता है। यह ratio यह समझने में मदद करता है कि देश की economy के आकार की तुलना में Government Debt कितना है।
कम और स्थिर Debt-to-GDP Ratio को आम तौर पर public debt sustainability को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण indicator माना जाता है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार की H2FY27 borrowing योजना में ₹7.86 ट्रिलियन की Dated Securities Borrowing, 23 weekly auctions और ₹15,000 करोड़ के Sovereign Green Bonds शामिल हैं। Longer-tenor securities पर बढ़ता जोर सरकार की debt management strategy का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही Treasury Bills और WMA के जरिए short-term cash requirements को manage करने की योजना बनाई गई है।
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