मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। विशेष रूप से तेल और गैस की आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ने से कई देशों की चिंता बढ़ गई है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। क्योंकि भारत अपनी रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और इसका बड़ा भाग एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग—स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़—से होकर गुजरता है।
यदि इस मार्ग में बाधा आती है तो भारत में एलपीजी की आपूर्ति और कीमतों दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत की एलपीजी व्यवस्था क्या है, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ क्यों महत्वपूर्ण है और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।
भारत में LPG की मांग और आयात
भारत में एलपीजी का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
- भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 40% घरेलू उत्पादन से पूरा करता है।
- जबकि लगभग 60% एलपीजी विदेशों से आयात की जाती है।
भारत मुख्य रूप से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के देशों से एलपीजी आयात करता है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश हैं:
- कतर – लगभग 34% आपूर्ति
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – लगभग 26%
- कुवैत – लगभग 8%
इन देशों से आने वाली गैस का अधिकांश हिस्सा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से होकर भारत और एशिया के अन्य देशों तक पहुंचता है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Strait of Hormuz विश्व का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है।

यह समुद्री मार्ग पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) को गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर से जोड़ता है।
भौगोलिक स्थिति की बात करें तो:
- इसके उत्तर में ईरान है
- दक्षिण में ओमान और UAE स्थित हैं
- यह मार्ग कुछ स्थानों पर मात्र 33 से 95 किलोमीटर तक चौड़ा है
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के संदर्भ में इसका महत्व बेहद बड़ा है।
- दुनिया के कुल 20–22% तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है।
- मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देश जैसे सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, UAE और कतर इसी रास्ते से ऊर्जा निर्यात करते हैं।
- यदि यह मार्ग बंद होता है तो एशिया के बड़े आयातक देशों—भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया—पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में तनाव बढ़ता है और जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो भारत को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
1. LPG और तेल की कीमतों में वृद्धि
सप्लाई कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG के दामों पर पड़ेगा।
2. गैस आपूर्ति में बाधा
भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से आती है। यदि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो गैस की उपलब्धता कम हो सकती है।
3. परिवहन और उद्योग पर असर
ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत, औद्योगिक उत्पादन और महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम
संभावित संकट को देखते हुए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं ताकि घरेलू उपभोक्ताओं पर कम से कम प्रभाव पड़े।
1. तेल कंपनियों को वित्तीय सहायता
सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों को सब्सिडी सहायता दी है:
- Indian Oil Corporation
- Bharat Petroleum Corporation Limited
- Hindustan Petroleum Corporation Limited
इन कंपनियों को बढ़ती गैस कीमतों के बावजूद उपभोक्ताओं को सस्ती गैस उपलब्ध कराने के लिए हजारों करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
2. घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को अधिक से अधिक एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
3. घरेलू उपयोग को प्राथमिकता
गैस की सीमित उपलब्धता की स्थिति में सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है, ताकि रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो।
4. गैस के औद्योगिक उपयोग में कटौती
जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए गैस की आपूर्ति कम की जा सकती है ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।
एलपीजी उपयोग में तेज वृद्धि
भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या पिछले दशक में तेजी से बढ़ी है।
2015 में उपभोक्ता – लगभग 14.86 करोड़
2025 में उपभोक्ता – लगभग 33 करोड़ से अधिक
- इस वृद्धि का मुख्य कारण है
Pradhan Mantri Ujjwala Yojana. इस योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए गए, जिससे देश में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ा।
आगे क्या हो सकता है?
यदि मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो:
- तेल और गैस की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है
- ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं
- भारत को वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है
- भारत पहले से ही ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव इस मार्ग की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ना तय है।
हालांकि भारत सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक जोर देना आवश्यक होगा।
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