राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी (65th National Exhibition of Art) और तीसरी प्रिंट बिएनाले इंडिया 2026 (3rd Print Biennale India 2026) के पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया है। इस कार्यक्रम का आयोजन ललित कला अकादमी ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से किया गया है।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों ने भाग लिया एवं इस दौरान कुल 6,175 कलाकृतियाँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 270 को प्रदर्शनी के लिए चुना गया। इसके अलावा, 20 कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया।
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ललित कला अकादमी और राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी
ललित कला अकादमी भारत की राष्ट्रीय कला अकादमी है। इसकी स्थापना वर्ष 1954 में देश में दृश्य कलाओं (Visual Arts) के विकास और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से की गई थी। यह केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी की शुरुआत वर्ष 1955 में हुई थी। इसकी पहली प्रदर्शनी नई दिल्ली स्थित जयपुर हाउस में आयोजित की गई थी, जहाँ लगभग 1,200 कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई थीं। समय के साथ यह प्रदर्शनी भारतीय समकालीन कला के प्रमुख आयोजनों में शामिल हो गई।
वर्ष 2026 की प्रदर्शनी में कलाकृतियों का चयन दो चरणों में किया गया:
- पहला चरण: प्रदर्शनी में प्रदर्शित करने के लिए 270 कलाकृतियों का चयन किया गया।
- दूसरा चरण: ललित कला अकादमी पुरस्कारों के लिए 20 कलाकारों की कलाकृतियों का चयन किया गया।
ललित कला अकादमी पुरस्कार 2026: 20 कलाकारों को सम्मान
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2026 में विभिन्न कला विधाओं से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया गया। इनमें चित्रकला, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग और ड्राइंग जैसी विधाएँ शामिल हैं।
कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों में टेराकोटा, सिरेमिक, सागौन की लकड़ी, संगमरमर, तांबा, एचिंग और कैनवास जैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया। यह विविधता भारतीय समकालीन कला की समृद्धि और कलाकारों की रचनात्मकता को दर्शाती है।
20 Artists Awarded Lalit Kala Akademi Awards
| No. | Artist | Awarded Artwork | Medium | Category |
| 1 | Chandra Shekhar | Sain My Entire World – I | Terracotta | Sculpture |
| 2 | Gopal Chandra Naskar | The Tune of The Srimad Bhagavad Gita | Acrylic on Canvas | Painting |
| 3 | Kishor Kumar Narkhadiwala | Paryavaran | Oil on Canvas | Painting |
| 4 | Mrinal Dey | Hopeless Settlement | Acrylic on Canvas | Painting |
| 5 | Nidhi Chopra | Tangible Dreams | Ceramic | Sculpture |
| 6 | Nimai Singh | Sarungbam Mudra – I | Teak Wood | Sculpture |
| 7 | Pankaj Kumar Sharma | Haloed Traveler – II | Panel Works | Drawing |
| 8 | Pooja Rajpoot | Prakriti Shoshan | White Marble | Sculpture |
| 9 | Praveen Kumar | Where The Walls Remember | Mix Medium | Painting |
| 10 | Pritam Madhukar | Deuskar Of Time and The City | Etching | Printmaking |
| 11 | Rajendra Prasad | Sujata With Buddha | Water Color (Wash) | Painting |
| 12 | Ramesh Vithal | Thorat Untitled – II | Oil on Canvas | Painting |
| 13 | Raviram Ramakrishnan | Fisherwoman | Copper, Oxidised, Welded | Sculpture |
| 14 | Sanjay Kumar | When Memories Come Back – 7 | Mix Media | Painting |
| 15 | Sanjay Kumar | Sahani Youth | Oil on Canvas | Painting |
| 16 | Sanjib Kumar Gogoi | Aakar Nirankar – II | Acrylic & Oil on Canvas | Painting |
| 17 | Santa Deb | Attraction of Simplicity | Ceramic | Sculpture |
| 18 | Siddharth Shahjirao Shingade | Trees | Mix Media | Painting |
| 19 | Usharanjan Mandal | Wheel of A Crowded City | Mix Media | Any Other Medium |
| 20 | Vijendra Sharma | Life 2025 | Oil on Canvas | Painting |
प्रिंट बिएनाले इंडिया क्या है?
बिएनाले (Biennale) एक ऐसा आयोजन है, जो सामान्यतः प्रत्येक दो वर्ष में एक बार आयोजित किया जाता है। प्रिंट बिएनाले इंडिया में कलाकार प्रिंटमेकिंग से जुड़ी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन करते हैं और नई तकनीकों तथा कलात्मक प्रयोगों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करते हैं।
प्रिंटमेकिंग एक ऐसी कला विधा है, जिसमें किसी प्लेट, ब्लॉक या स्क्रीन पर चित्र तैयार करके उसे कागज अथवा किसी अन्य माध्यम पर छापा जाता है।
प्रिंटमेकिंग की प्रमुख तकनीकें निम्नलिखित हैं:
- एचिंग (Etching)
- वुडकट (Woodcut)
- लिथोग्राफी (Lithography)
- स्क्रीन प्रिंटिंग (Screen Printing)
वर्ष 2026 में तीसरी प्रिंट बिएनाले इंडिया का आयोजन 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के साथ किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रैंड प्राइज विजेताओं और विशेष उल्लेख (Honourable Mention) प्राप्त करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन की प्रमुख बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कला को भारत की संस्कृति, परंपराओं और सभ्यतागत विकास की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित करने के साथ-साथ नवाचार और नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
युवा कलाकारों को प्रोत्साहन: उभरते कलाकारों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और विभिन्न कला माध्यमों के साथ प्रयोग करने के अवसर दिए जाने चाहिए।
कला की व्यापक पहुँच: आम लोगों की कला में भागीदारी बढ़ाने और कलाकृतियों को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण कलाकारों का समर्थन: ग्रामीण कलाकारों को प्रोत्साहित करके स्थानीय और पारंपरिक कला विरासत को संरक्षित किया जाना चाहिए।
प्रिंटमेकिंग को पहचान: प्रिंटमेकिंग को एक महत्वपूर्ण कला विधा के रूप में बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
परंपरा और नवाचार का संतुलन: भारतीय कला की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक प्रयोगों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को गोंड चित्रकला की एक कलाकृति भेंट की। गोंड चित्रकला भारत की प्रसिद्ध पारंपरिक जनजातीय कला विधाओं में से एक है।
निष्कर्ष
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और तीसरी प्रिंट बिएनाले इंडिया 2026 ने भारतीय कला की विविधता, पारंपरिक विरासत और आधुनिक रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए ललित कला अकादमी की स्थापना, राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी की शुरुआत और इस आयोजन से जुड़े प्रमुख तथ्य महत्वपूर्ण हैं।
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