Siliguri Corridor: भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (North East) को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एक बेहद संकरा भूभाग आज फिर चर्चा में है। पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई नेशनल हाईवे स्ट्रेच सौंपने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति, चीन-बांग्लादेश फैक्टर और नॉर्थ ईस्ट कनेक्टिविटी से जुड़ा हुआ है।
क्या है Siliguri Corridor या Chicken’s Neck?
Siliguri Corridor सिलिगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित एक बेहद संकरा भूभाग है जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर लगभग 20 से 22 किलोमीटर मानी जाती है जबकि इसकी लंबाई लगभग 60 किलोमीटर है।इसे “Chicken’s Neck” इसलिए कहा जाता है क्योंकि नक्शे में इसका आकार मुर्गी की गर्दन जैसा दिखाई देता है।
यह कॉरिडोर निम्न राज्यों को भारत से जोड़ता है:
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिजोरम
- त्रिपुरा
- सिक्किम

यदि यह कॉरिडोर किसी कारण से बाधित हो जाए, तो पूरा नॉर्थ ईस्ट भारत के मुख्य भूभाग से लगभग कट सकता है।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर का भू-राजनीतिक महत्व

सिलिगुड़ी कॉरिडोर चार अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्रों के बीच स्थित है:
- उत्तर में नेपाल और भूटान
- दक्षिण में बांग्लादेश
- उत्तर-पूर्व में चीन नियंत्रित तिब्बत क्षेत्र
इसी वजह से यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा रणनीति का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Chicken’s Neck?
1. सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण
यह नॉर्थ ईस्ट तक पहुंचने का भारत का प्रमुख जमीनी मार्ग है। सेना की:
- ट्रूप मूवमेंट
- हथियार सप्लाई
- लॉजिस्टिक्स
- सैन्य रीइन्फोर्समेंट
सब कुछ काफी हद तक इसी कॉरिडोर पर निर्भर करता है।
यदि युद्ध या किसी अन्य कारण से यह क्षेत्र बाधित होता है, तो भारत को नॉर्थ ईस्ट तक सप्लाई पहुंचाने में गंभीर समस्या आ सकती है।
2. आर्थिक लाइफलाइन
नॉर्थ ईस्ट में पहुंचने वाली लगभग हर जरूरी चीज इसी मार्ग से गुजरती है:
- ईंधन
- खाद्य सामग्री
- दवाइयां
- औद्योगिक सामान
इसलिए इसे नॉर्थ ईस्ट की “Economic Lifeline” भी कहा जाता है।
3. चीन फैक्टर
2017 के Doklam Standoff के बाद सिलिगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई। डोकलाम क्षेत्र भारत, भूटान और चीन के ट्राई-जंक्शन के पास स्थित है। भारत को डर है कि यदि चीन इस इलाके में अपना सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करता है, तो वह सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर दबाव बना सकता है। इसी कारण भारत लगातार सड़क चौड़ीकरण, टनल प्रोजेक्ट, सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे नेटवर्क को मजबूत कर रहा है।
बंगाल सरकार ने क्या फैसला लिया है?
पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर और उत्तर बंगाल क्षेत्र से गुजरने वाले सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) से जुड़े भूमि एवं स्ट्रेच को केंद्र सरकार की एजेंसियों को सौंपने का निर्णय लिया है।
इन प्रोजेक्ट्स पर काम मुख्य रूप से National Highways Authority of India & National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited द्वारा किया जाएगा।
बांग्लादेश फैक्टर क्यों महत्वपूर्ण है?
सिलिगुड़ी कॉरिडोर के ठीक दक्षिण में बांग्लादेश स्थित है।
हाल के वर्षों में:
- चीन का बांग्लादेश में बढ़ता प्रभाव
- चीनी फंडेड इंफ्रास्ट्रक्चर
- एयरफील्ड अपग्रेड
- रणनीतिक सहयोग
भारत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इसी कारण भारत अब नॉर्थ ईस्ट और सिलिगुड़ी क्षेत्र में रणनीतिक तैयारियां तेज कर रहा है।
भारत के बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट
अंडरग्राउंड रेलवे प्रोजेक्ट
भारत भविष्य में ऐसी अंडरग्राउंड रेलवे कनेक्टिविटी विकसित करने पर काम कर रहा है जिससे युद्ध या आपातकालीन स्थिति में भी सप्लाई बाधित न हो।
ब्रह्मपुत्र अंडरवाटर टनल
असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे टनल परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है ताकि:
- ट्रूप मूवमेंट तेज हो
- लॉजिस्टिक्स सुधरे
- यात्रा समय कम हो
हाईवे एयरस्ट्रिप
कई हाईवे को इस प्रकार विकसित किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर उन पर फाइटर एयरक्राफ्ट उतारे जा सकें।
Act East Policy से क्या संबंध है?
Association of Southeast Asian Nations के साथ भारत अपनी कनेक्टिविटी और व्यापार बढ़ाना चाहता है।
भारत की Act East Policy का लक्ष्य है:
- म्यांमार से कनेक्टिविटी
- थाईलैंड तक सड़क नेटवर्क
- दक्षिण-पूर्व एशिया से व्यापार
लेकिन इसके लिए सिलिगुड़ी कॉरिडोर का मजबूत और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है।
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