बिहार की प्रमुख रियासतें: बिहार के इतिहास में रियासतों, जमींदारियों और स्थानीय सरदारियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। खासकर मुगल काल, बंगाल के नवाबों के दौर और ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार में कई बड़े भू-स्वामी एवं राजघराने प्रभावशाली रहे।
एक महत्वपूर्ण बात: बिहार की सभी प्रसिद्ध “रियासतें” तकनीकी अर्थ में Princely States नहीं थीं। कई वास्तव में जमींदारी एस्टेट (Zamindari Estate) या Chieftaincy थीं। इसलिए BPSC की तैयारी में “बिहार की प्रमुख रियासतें” को व्यापक अर्थ में पढ़ना अधिक उपयोगी है। स्वतंत्रता के समय बिहार से संबद्ध कई छोटी रियासतों/एस्टेटों को बाद में भारतीय संघ और बिहार में मिला दिया गया।
बिहार की प्रमुख रियासतें
- दरभंगा
इस राज्य का संस्थापक पंडित महेश ठाकुर थे. मुग़ल सम्राट अकबर ने इनकी विद्वता से प्रभावित होकर इन्हें मिथिला का राज्य दिया था. दरभंगा रियासत के अधिपति राजा महाराजा रामेश्वर सिंह के दीवान के समय इस रियासत में विज्ञान और इतिहास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई। दरभंगा के प्रसिद्ध शासक महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह ने शिक्षा, साहित्य तथा सामाजिक कार्यों को बढ़ावा दिया।
- गिद्धौर
इस रियासत की नीवं 12वीं शताब्दी में बुंदेलखंड के राजा वीर विक्रमादित्य ने की थी. इसके साथ ही इसी राजवंश के राजा पूरनमल ने बैद्यनाथधाम (देवघर) में शिव मंदिर बनवायाथा.
- टेकारी
गया जिले में स्थित इस रियासत के संस्थापक धीर सिंह के पुत्र सुंदर सिंह ने बंगाल और बिहार के सूबेदार को सासाराम तथा नरहन (दरभंगा) के युद्धों में महत्वपूर्ण सहायता की थी। उनकी सेवाओं से प्रसन्न होकर उन्हें ‘राजा’ की उपाधि प्रदान की गई। कालांतर में राजा मिजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्रों के बीच रियासत का बँटवारा हो गया।
- अमावा
टेकारी के महाराज कुमार मदनारायण सिंह के हिस्से में पटना जिले में अमावा राज्य कायम हुआ। कालांतर में इसके अधिपति राजा हरिहर प्रसाद सिंह बहादुर हुए। इनके राजकुमार का विवाह टेकारी नरेश महाराजा गोपाल शरण सिंह की इकलौती पुत्री से हुआ। इस विवाह के बाद टेकारी और अमावा दोनों रियासतें आपस में मिल गईं।
- हथुआ
हथुआ रियासत की स्थापना मुसलमानों की बिहार विजय से पहले ही हो चुकी थी। इसके 27वें राजा खेमकरण साही को मुगल दरबार से ‘महाराजा बहादुर’ की उपाधि मिली थी। 1769 ई. में हथुआ नरेश महाराजा फतेह साही ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह किया।
- बनैली
बनैली रियासत वर्तमान पूर्णिया जिले में स्थित थी। दरभंगा जिले के बेगनी नवादा गाँव के मैथिल ब्राह्मण पंडित गदाधर झा की विद्वता से प्रभावित होकर दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने उन्हें कुछ गाँव जागीर के रूप में दिए। बाद में उनके वंशजों ने इस क्षेत्र में अपनी रियासत स्थापित की।
- डुमराँव
डुमराँव परमार वंशी राजपूतों की एक प्रमुख रियासत थी। इसी वंश के भोज सिंह ने यहाँ के आसपास अपना राज्य स्थापित किया था। उनके नाम पर डुमराँव में भोजपुर गाँव बसाया गया। बाद में यह रियासत तीन शाखाओं में विभाजित हो गई एवं इसके नाम है: डुमराव, जगदीशपुर और बक्सर
महत्वपूर्ण तथ्य
- डुमराँव राजवंश की स्थापना परमार वंश से संबंधित थी।
- डुमराँव के अंतिम महाराजा कमल सिंह थे।
- 1952 में गठित देश के प्रथम लोकसभा चुनाव में कमल सिंह बिहार के अंतिम महाराजा के रूप में चर्चित रहे।
- कमल सिंह का निधन जनवरी 2020 में हुआ।
- जगदीशपुर
1857 के सिपाही विद्रोह के प्रमुख नेताओं में बाबू कुंवर सिंह का नाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वे जगदीशपुर रियासत के अधिपति (जमींदार) थे। उनके भाई के वंशज डुमराँव में रहते थे।
- बक्सर
1577 ई. में राजा दलपत सिंह यहाँ के राजा बने। वे इस राजवंश के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक थे। कालांतर में यह रियासत डुमराँव राज्य में विलीन हो गई।
- गंधवार
गंधवारिया लोग स्वयं को परमार राजपूत और मिथिला के कर्णाट वंशीय नरेश राजा नयनदेव सिंह के वंशज मानते थे। मिथिला के महाराज हरिसिंह देव के नेपाल चले जाने के बाद मिथिला में अराजकता फैल गई। इस अवसर का लाभ उठाकर परमारों ने दरभंगा जिले के गंधवार और भैर नामक स्थानों में अपना राज्य स्थापित किया।
गंधवारिया की तीन प्रमुख रियासतें थीं:
- सोनबरसा
- बबुआरी
- पचगछिया
- भगवानपुर
भगवानपुर रियासत शाहाबाद जिले के चैनपुर परगना में स्थित थी। यहाँ के राजपूत शासक तक्षशिला को अपना आदि निवास-स्थान मानते थे।
- बरारी
दरभंगा जिले के निवासी पंडित नारायण ठाकुर तांत्रिक को भागलपुर जिले में जागीर प्राप्त हुई थी। इसी जागीर से बरारी रियासत की स्थापना हुई।
बिहार की अन्य छोटी रियासतें
- देव
गया जिले (वर्तमान औरंगाबाद) की इस रियासत के संस्थापक राजा मान सिंह थे। वे मेवाड़ के एक राणा के छोटे भाई थे। प्रारंभ में इस रियासत की राजधानी उमगा (उमागढ़) थी। बाद में राजधानी देव में स्थानांतरित कर दी गई।
- बेतिया
इस रियासत के संस्थापक उग्रसेन थे। इनके पुत्र राजा राजसिंह को मुगल सम्राट अकबर से ‘राजा’ की उपाधि प्राप्त हुई थी।
- 16. हरिजी की रियासत
यह रियासत आरा में स्थित थी। इसके अधिपति रायबहादुर हरिहर प्रसाद सिंह थे। इनके पिता दीवान जयप्रकाश लाल डुमराँव के राजा के दीवान रह चुके थे।
- 17. सुरसंड
सुरसंड उस समय मुजफ्फरपुर जिले में स्थित था। वर्तमान में सुरसंड सीतामढ़ी जिले में है। मिथिला के नरेश राजा प्रताप सिंह के समय इस राज्य की स्थापना हुई थी।
- 18. पलामू
लगभग 400 वर्ष पहले खरवारों के राजपूत दक्षिण-पूर्वी पलामू (वर्तमान झारखंड) में शासन करते थे। इनकी राजधानी औरंगा नदी के किनारे पलामूगढ़ में थी।
- सोनपुरा
यह रियासत पलामू जिले में स्थित थी। इस राजवंश के कन्नर साही देव ने ‘जमला’ और ‘लोजा’ परगनों को दिल्ली के बादशाह से जागीर के रूप में प्राप्त किया था। उन्होंने सोनपुरा में अपनी राजधानी स्थापित की।
बिहार की प्रमुख रियासतें – एक नजर में
| रियासत/राज | प्रमुख क्षेत्र | प्रमुख वंश/परिवार | परीक्षा में प्रमुख तथ्य |
| दरभंगा राज | दरभंगा, मिथिला | खंडवाला/मैथिल ब्राह्मण | मिथिला, मैथिली, शिक्षा-संस्कृति |
| हथुआ राज | गोपालगंज, सीवान, सारण | बघोचिया परंपरा | फतेह बहादुर शाही |
| डुमराँव राज | बक्सर, भोजपुर | उज्जैनिया राजपूत | शाहाबाद क्षेत्र |
| टिकारी राज | गया, मगध | भूमिहार ब्राह्मण | विशाल जमींदारी |
| गिद्धौर राज | जमुई | चंदेल राजपूत | दक्षिण बिहार की सरदारी |
| बनैली राज | पूर्णिया, भागलपुर आदि | मैथिल ब्राह्मण परंपरा | पूर्वोत्तर बिहार की बड़ी जमींदारी |
| बेतिया राज | चंपारण | स्थानीय राजपरिवार | चंपारण का इतिहास |
| हुसेपुर राज | गोपालगंज-सीवान | स्थानीय राजपरिवार | फतेह बहादुर शाही |
| जगदीशपुर | भोजपुर | उज्जैनिया राजपूत | वीर कुंवर सिंह, 1857 |
| रामगढ़ | दक्षिण बिहार/छोटानागपुर क्षेत्र | राजपरंपरा | बिहार-झारखंड का ऐतिहासिक संबंध |
| अमावाँ राज | मगध | स्थानीय जमींदार परिवार | मगध की जमींदारी |
| नरहन राज | उत्तर बिहार | स्थानीय जमींदार परिवार | मिथिला/समस्तीपुर क्षेत्र |
