Andaman Gas Discovery: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान सागर में एक नए अपतटीय (Offshore) क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की खोज की है। यह खोज ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी आयात निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटा है। यह अंडमान क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की दूसरी महत्वपूर्ण खोज है, जिसने इस पूरे क्षेत्र की संभावनाओं को और अधिक मजबूत कर दिया है।
Andaman Gas की खोज कहाँ हुई है?
Andaman Gas Discovery: ऑयल इंडिया द्वारा की गई यह खोज अंडमान द्वीप समूह के निकट स्थित विजयपुरम-3 (Vijaypuram-3) कुएं में हुई है। यह क्षेत्र तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- समुद्र की गहराई लगभग 355 मीटर है।
- ड्रिलिंग 1900 मीटर से अधिक गहराई तक की गई।
- यह एक अपतटीय (Offshore) ब्लॉक है, जहां ऊर्जा संसाधनों का दोहन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।
दूसरी बार मिली सफलता
इससे पहले सितंबर 2025 में विजयपुरम-2 कुएं में भी प्राकृतिक गैस की खोज की गई थी। वहां प्राप्त गैस में मीथेन की मात्रा लगभग 87 प्रतिशत पाई गई थी, जो वाणिज्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार दो सफल खोजों ने यह संकेत दिया है कि अंडमान बेसिन में बड़े पैमाने पर हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हो सकते हैं।
अंडमान बेसिन क्यों है खास?
अंडमान बेसिन हिंद महासागर के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक क्षेत्र है। यह क्षेत्र भारत, म्यांमार, थाईलैंड और इंडोनेशिया के बीच फैला हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि म्यांमार और इंडोनेशिया के समुद्री क्षेत्रों में पहले ही बड़े गैस भंडार खोजे जा चुके हैं। भूवैज्ञानिक लंबे समय से मानते रहे हैं कि इसी संरचना का विस्तार अंडमान क्षेत्र तक भी हो सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
1. आयात निर्भरता में कमी
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
- कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरत आयात से पूरी होती है।
- प्राकृतिक गैस की मांग का 50% से अधिक हिस्सा आयातित LNG से आता है।
यदि अंडमान क्षेत्र में बड़े भंडार मिलते हैं तो भारत की विदेशी ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है।
2. ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
मध्य पूर्व में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से ऐसी परिस्थितियों का प्रभाव कम किया जा सकेगा।
3. व्यापार घाटे में कमी
ऊर्जा आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ने से भारत का व्यापार घाटा कम हो सकता है और रुपये पर दबाव भी घट सकता है।
प्राकृतिक गैस क्यों है भविष्य का महत्वपूर्ण ईंधन?
प्राकृतिक गैस को “ट्रांजिशन फ्यूल” कहा जाता है क्योंकि यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच पुल का काम करती है।
इसके प्रमुख लाभ हैं:
- कोयले की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन
- बेहतर ऊर्जा दक्षता
- स्वच्छ दहन प्रक्रिया
- उद्योगों और बिजली उत्पादन में व्यापक उपयोग
भारत अपने ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
अंडमान क्षेत्र का रणनीतिक महत्व
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत के लिए केवल ऊर्जा के दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह क्षेत्र विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca), के निकट स्थित है।
यदि यहां ऊर्जा परियोजनाओं का विकास होता है तो:
- भारत की समुद्री उपस्थिति मजबूत होगी।
- रणनीतिक बुनियादी ढांचा विकसित होगा।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा।
अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की नई खोज भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। लगातार दूसरी सफलता ने यह उम्मीद बढ़ा दी है कि अंडमान बेसिन भविष्य में भारत का एक महत्वपूर्ण गैस उत्पादक क्षेत्र बन सकता है।
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